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Showing posts from October, 2015

प्रदूषण होगी किसी के लिए समस्या, भारतीयों के लिए यह एक कलंक

प्रदूषण होगी किसी के लिए समस्या मगर हम भारतीयों के लिए यह किसी कलंक से कम नहीं ख़ास कर मुझ काफिर हिन्दू के लिए जिसके पूर्वज दिन का आरम्भ सूर्य और आँगन में बसी तुलसी को अर्घ देकर करते, प्रकृति से प्रेम इतना के कुदरत की हर वस्तु में उन्हें भगवान दीखते, पेड़ पौधों से लेकर जिव -जंतु प्रत्येक पूजनीय माने जाते। पूजन की विधि अर्थात हवन कार्य भी कुछ इस प्रकार थी की प्रदुषण करना तो दूर वातावरण शुद्धि का कार्य ज़्यादा होता। जहाँ नदियों को माँ का दर्ज़ा दिया जाता। ऐसे राष्ट्र में प्रदुषण के निवारण की चर्चा होना बहुत खेदजनक है। *1730 की वह घटना जब राजस्थान के खेजड़ली गांव में सिर्फ एक वृक्ष की रक्षा के लिए अमृता देवी नामक स्त्री समेत 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। जिस राष्ट्र में जाम्भोजी के वो अनुयायी मौजूद हों जो पर्यावरण के रक्षा के खातिर अपने प्राण त्यागने को तैयार हो बिश्नोई कहलाये। उस राष्ट्र में पर्यावरण सुरक्षा की बात शर्मनाक है। व्यापार में पाई पाई का हिसाब रखने वाले और परीक्षा में 1-1 अंक कर उत्तीर्ण होने भर अंक का महत्व समझने वाले अगर किसी मनुष्य द्वारा अप्राकृतिक ढंग...

गाँधी जयंती: भगत सिंह से ज़्यादा हिंसक थे महात्मा गांधी

वैसे तो जिन लोगों के कारण आज हम सब खुली हवा में सांस ले रहे उनपर कुछ भी कहने का अधिकार मुझे क्या किसी भी भारतीय को नहीं, ऐसा मैं समझता हूँ। लेकिन जिस तरह से आज के आधुनिक युग में दूसरे की छवि धूमिल कर खुद को चमकाने का सरल, सस्ता और गिरा हुआ माध्यम अपनाया जा रहा उससे यह लेख लिखना ज़रूरी हो गया है। महात्मा गाँधी को इस देश में कुछ लोग यह कह तिरस्कृत कर देते हैं के महात्मा गांधी की आज़ादी लेने की शैली गलत थी, यांनी अहिंसा की। और वहीँ दूसरी ओर वे शहीद भगत सिंह को उनकी हिंसा की शैली के लिए सच्चा देश भक्त बताते हैं। पर शायद उन्हें ज्ञात नहीं के महात्मा गाँधी भगत सिंह से ज्यदा हिंसक थे। अरे भाई, चाकू दूसरे की गर्दन पर रखो या अपनी, बात तो एक ही है। हत्या करने की धमकी दूसरों को दो या खुद को  बात बराबर है। हानि दूसरो को पहुचाओ या स्वयं को, दोनों हिंसा के श्रेणी में ही आते हैं। भगत सिंह ने असेंबली में बम विस्टफोट कर दूसरों की जान जोखिम में डाली तो महात्मा गांधी ने आमरण अनसन की चुनौती देकर खुद की जान जोखिम में। जिस व्यक्ति के करोङो अनुयायी हों, अगर वो जान देने की बात करे, सभाए कर भीड़ क...