प्रदूषण होगी किसी के लिए समस्या मगर हम भारतीयों के लिए यह किसी कलंक से कम नहीं ख़ास कर मुझ काफिर हिन्दू के लिए जिसके पूर्वज दिन का आरम्भ सूर्य और आँगन में बसी तुलसी को अर्घ देकर करते, प्रकृति से प्रेम इतना के कुदरत की हर वस्तु में उन्हें भगवान दीखते, पेड़ पौधों से लेकर जिव -जंतु प्रत्येक पूजनीय माने जाते। पूजन की विधि अर्थात हवन कार्य भी कुछ इस प्रकार थी की प्रदुषण करना तो दूर वातावरण शुद्धि का कार्य ज़्यादा होता। जहाँ नदियों को माँ का दर्ज़ा दिया जाता। ऐसे राष्ट्र में प्रदुषण के निवारण की चर्चा होना बहुत खेदजनक है। *1730 की वह घटना जब राजस्थान के खेजड़ली गांव में सिर्फ एक वृक्ष की रक्षा के लिए अमृता देवी नामक स्त्री समेत 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। जिस राष्ट्र में जाम्भोजी के वो अनुयायी मौजूद हों जो पर्यावरण के रक्षा के खातिर अपने प्राण त्यागने को तैयार हो बिश्नोई कहलाये। उस राष्ट्र में पर्यावरण सुरक्षा की बात शर्मनाक है। व्यापार में पाई पाई का हिसाब रखने वाले और परीक्षा में 1-1 अंक कर उत्तीर्ण होने भर अंक का महत्व समझने वाले अगर किसी मनुष्य द्वारा अप्राकृतिक ढंग...