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Showing posts from 2015

जीवन

कौन थाह लगा सका इस यात्रा का, हर एक शिकार है अपने चश्मे का। कुछ पुरुष तो कुछ पशू कहाए। बुनियादी औज़ारों ने सिखाया प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष का पाठ, और आज तथ्य हुए जीवन को तौलने का ...

सेवानीति नहीं करोगे वर्टो ?

राजनीति...!! एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही जनमानस के मस्तिष्क में भिन्न भिन्न मत जल उठते हैं कुछ लोग इसे एक दलदल का नाम देते हैं तो कुछ इस शब्द की ओर लालसा भरे निगाओं से टकटकी लगाए रहते हैं तो कुछ इसे अपने निजी स्वार्थ के लिए एक शस्त्र की तरह इस्तेमाल करते हैं। चाहे जो भी कह लें लेकिन एक स्वच्छ राजनीति और राजनीतिज्ञ की ज़रूरत आज सम्पूर्ण विश्व को है। कहते हैं नाम का प्रभाव मनुष्य शख्सियत पर ज़रूर पड़ता है। यह बात कितनी सही है इस बात का ज्ञान मुझे नहीं पर इतना ज़रूर है की राजनीति शब्द का प्रभाव राजनीतिज्ञों पर बखूबी पड़ा है। अरे जिस शब्द में ही राज करने का प्रलोभन हो उससे सेवा की उम्मीद ही कैसे की जा सकती है? कभी अटल जी , शाश्त्री जी जैसे नेताओं ने भारतीय राजनीति को नया आयाम दिया तो वहीँ ए राजा, कनिमोझी जैसों ने कलंकित। आपने नेताओं को किसी निम्न पद पर आसक्त व्यक्ति को गालियाँ देते या अपने शक्ति का प्रदर्शन करते अक्सर देखा ही होगा। • राजनीति नहीं सेवानीति पर आज बदलते युग के साथ-साथ समय इस शब्द में भी परिवर्तन चाहता है। राजनीति से सेवानीति में तब्दील होना और इस शब्द के मूल अर्थ की सा...

प्रदूषण होगी किसी के लिए समस्या, भारतीयों के लिए यह एक कलंक

प्रदूषण होगी किसी के लिए समस्या मगर हम भारतीयों के लिए यह किसी कलंक से कम नहीं ख़ास कर मुझ काफिर हिन्दू के लिए जिसके पूर्वज दिन का आरम्भ सूर्य और आँगन में बसी तुलसी को अर्घ देकर करते, प्रकृति से प्रेम इतना के कुदरत की हर वस्तु में उन्हें भगवान दीखते, पेड़ पौधों से लेकर जिव -जंतु प्रत्येक पूजनीय माने जाते। पूजन की विधि अर्थात हवन कार्य भी कुछ इस प्रकार थी की प्रदुषण करना तो दूर वातावरण शुद्धि का कार्य ज़्यादा होता। जहाँ नदियों को माँ का दर्ज़ा दिया जाता। ऐसे राष्ट्र में प्रदुषण के निवारण की चर्चा होना बहुत खेदजनक है। *1730 की वह घटना जब राजस्थान के खेजड़ली गांव में सिर्फ एक वृक्ष की रक्षा के लिए अमृता देवी नामक स्त्री समेत 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी। जिस राष्ट्र में जाम्भोजी के वो अनुयायी मौजूद हों जो पर्यावरण के रक्षा के खातिर अपने प्राण त्यागने को तैयार हो बिश्नोई कहलाये। उस राष्ट्र में पर्यावरण सुरक्षा की बात शर्मनाक है। व्यापार में पाई पाई का हिसाब रखने वाले और परीक्षा में 1-1 अंक कर उत्तीर्ण होने भर अंक का महत्व समझने वाले अगर किसी मनुष्य द्वारा अप्राकृतिक ढंग...

गाँधी जयंती: भगत सिंह से ज़्यादा हिंसक थे महात्मा गांधी

वैसे तो जिन लोगों के कारण आज हम सब खुली हवा में सांस ले रहे उनपर कुछ भी कहने का अधिकार मुझे क्या किसी भी भारतीय को नहीं, ऐसा मैं समझता हूँ। लेकिन जिस तरह से आज के आधुनिक युग में दूसरे की छवि धूमिल कर खुद को चमकाने का सरल, सस्ता और गिरा हुआ माध्यम अपनाया जा रहा उससे यह लेख लिखना ज़रूरी हो गया है। महात्मा गाँधी को इस देश में कुछ लोग यह कह तिरस्कृत कर देते हैं के महात्मा गांधी की आज़ादी लेने की शैली गलत थी, यांनी अहिंसा की। और वहीँ दूसरी ओर वे शहीद भगत सिंह को उनकी हिंसा की शैली के लिए सच्चा देश भक्त बताते हैं। पर शायद उन्हें ज्ञात नहीं के महात्मा गाँधी भगत सिंह से ज्यदा हिंसक थे। अरे भाई, चाकू दूसरे की गर्दन पर रखो या अपनी, बात तो एक ही है। हत्या करने की धमकी दूसरों को दो या खुद को  बात बराबर है। हानि दूसरो को पहुचाओ या स्वयं को, दोनों हिंसा के श्रेणी में ही आते हैं। भगत सिंह ने असेंबली में बम विस्टफोट कर दूसरों की जान जोखिम में डाली तो महात्मा गांधी ने आमरण अनसन की चुनौती देकर खुद की जान जोखिम में। जिस व्यक्ति के करोङो अनुयायी हों, अगर वो जान देने की बात करे, सभाए कर भीड़ क...

हिंदी दिवस: अंग्रेजी बोल खुद तो आगे बढ़ोगे मगर देश को आगे न बढ़ा सकोगे।

अगर आपको भी छोटे लेख, स्टेटस, क्विक फैक्ट्स पढ़ अधूरी जानकारी जुटाने की आदत है तो इस लेख को पढ़ने के लिए आपको थोडा समय लेने की ज़रूरत है।  गत दिनों अपने भावी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का एक ट्वीट पढ़ा, जिसे पढ़ मन गर्व से सन गया। ट्वीट में इस बात का जिक्र था की आने वाले समय में डिजिटल मीडिया में तीन भाषाओं का दबदबा रहेगा, 1)अंग्रेजी, 2) चीनी, और तीसरा हिंदी। और यह ज़रूर होगा। दुनिया  16 प्रतिशत आबादी देने वाला भारत हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। भारत एक विविधता (diversity) पूर्ण देश है,  चाहे बात धर्म की हो या भूगोल की या बात हो भाषाओँ की। मैं इन सभी पहलुओं पर चर्चा करना चाहूँगा। सर्व प्रथम धर्म की, हमारे देश में जितने प्रकार के धर्म, मजहब,जातियां, संप्रदाय हैं इतनी किसी अन्य देश में नहीं इस कारण लोगों को जोड़ कर "रखना एंव रहना" कितना मुश्किल है यह आपको 'रहने' वाला माध्यम वर्ग का आदमी या 'रखने' वाला राजनीतिज्ञ(नेता) से बेहतर कोई और नहीं बता सकता। बात करते हैं भूगोल की, पूरब में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में रेगिस्तान, उत्तर में हिमालय की ब...

Lovely ka time-table

कभी बंद किताब के अंदर बिखरे हुए पन्नों को देखा है? कभी किसी अच्छे भले मुस्कुराते चेहरे में टूटे दांतों को देखा है? कभी अच्छी भली सपाट भूमि पर folding-faulting देखा है? कुछ यही हाल है हम B.A.(2nd year) वालों के समय-सारिणी (time-table) का भी। Lovely में कोई नियम चले न चले पर एक नियम ऐसा है जो अच्छे-भले, दुबले-मोटे छात्र- छात्राओं को भी सुबह यूनिवर्सिटी आते समय दौड़ने पर मजबूर कर देता है वो है attendence के लिए समय पर कक्षा में पहुचना। 5 मिनट की देरी भी आपको अपनी attandance गवां कर चुकानी पड़ सकती है। Lovely में इस नियम पर ख़ासा ध्यान दिया जाता है। कारण पूछने पर आप पाएंगे की समय का महत्व जीवन में ज़रूरी है अतः समय पे कक्षा में आये और अपने समय का सदुपयोग करे। पर दूसरी तरफ छात्रों को कक्षाओं के बिच मिलने वाला गैप उनकी समय सदुपयोग करने की आदत की धज्जियाँ उड़ा देता है। घंटे दो घंटे कक्षा में पढ़ने के बाद मिले घंटे दो घंटे के गैप में कुछ छात्र दोस्तों के साथ गप्पे मारने निकल पड़ते है, कुछ मॉल यात्रा पर, कुछ अपने होस्टल, तो कुछ मॉल में यूनिवर्सिटी प्रशाशन द्वारा उपलब्ध कराए गए मॉल के निचे बन...

ISIS वालों ने कुरान गलत पढ़ ली।

पहले मैं साफ़ कह दूँ के मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं। धर्म तो मानव जाती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ढंग है जीवन जीने का चाहे कोई भी धर्म हो। पर धर्म के नियम या जो syllabus है क्या वो हमेशा सामान रहेगा? कभी बदलना नहीं चाहिए? आज हमारे देश में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में isis का आतंक सुर्ख़ियों में है। सोशल मीडिया पर जिहाद के नाम पर रोज़ाना किसी वीडियो में कभी छत से फेंक कर, गला रेत कर, बच्चे से उसकी माँ की हत्या करवा वीडियो डाल लोगो में दहशत फैलाई जा रही। जहाँ एक तरफ मध्य एशिया आतंकवाद में जल रहा है वही धीरे-धीरे इस आग की तपन भारत तक महसूस हो रहीं हैं ।और कुछ दिनों पहले जो ताजातरीन भारतीय अध्यापकों के अगवा करने का मामला हमारे सामने आया उसमें आतंकियों ने उन्हें ये कह कर छोड़ा के हम टीचर्स को नहीं मारते:: वाह मेरी तो आँखें भर आई... झूठ भी कमसे कम हज़म होने वाला बोला करो... सीरिया,इराक जैसे मुल्कों में जिन हज़ारों  निर्दोषो को मारा उसमे टीचर्स नहीं होंगे क्या? साफ़ है भारतीय युवाओं में लोकप्रियता पाने  लिए यह किया गया। जब भी आतंकवाद की बात उठती है उसमें इस्लाम का नाम ज़रूर जुड़ता ...

yakub par daya

1993 मुम्बई बम धमाके में संदिग्ध याकूब मेमन को फांसी की सजा पर देश का रवैय्या देखे तो ... जिस तरह एक आतंकवादी पर देश बटाँ हुआ नज़र आ रहा है वैसा पहले कभी नहीं हुआ। इस पुरे घटना क्रम में 2 पहलु मुख्य है 1) राजनीती का 2) नैतिकता का राजनीती में कहा जाता है एक कुशल नेता वही है जो समस्याओं को हल न करे बल्कि समस्यां को पैदा करे। Aimim के प्रमुख एव वकील ओवैसी ने जिस तरह इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी उससे उनके कुशल नेता होना का पता चलता है....साफ़ है इन्हें अच्छी सहानुभूति हासिल होगी इस मसले में। ओवैसी साब का कहना है की याकूब को फांसी सिर्फ मुस्लमान होने की वजह और पोलिटिकल बैकग्राउंड न मिलने की वजह से हो रही.... उन्होंने यह तर्क रखा है की जब याकूब को फांसी हो रही तो बेअंत के हत्यारों, साध्वी प्रज्ञा, इंदिरा गांधी के हत्यारों को फांसी क्यू नहीं दी जा रही? अरे जनाब आप तो दिल के बड़े साफ़ नेता लगते है जो खुल कर कानून का  करने की बात कररहे है~ बाकियों को फांसी नहीं लगी तो याकूब को भी छोड़ दिया जाये... बहुत सही उत्तर प्रदेश में सपा सर्कार में नेता अबू आज़मी ने कहा...याकूब ने जांच एज...