जब भी कभी किसी रूढ़िवादी धारा में आविष्कार होता है तो पिछले सभी आविष्कार धाराशाही हो गिर पड़ते हैं। परंतु जिस विचारधारा (सिद्धांत) की चर्चा का विस्तार हो रहा वह नवीन नहीं। मात्र इस आधुनिक युग के मान्यताप्राप्त नवीन मिथ्या विचारधाराओं पर सत्य की पुनरुक्ति है। ◆ "हर सिक्के के दो पहलु होते हैं", "कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है"◆ एक समय था जब दुनिया इस धरा को चौकोर मानती थी आधुनिक यंत्रों के सटीक आंकलन ने इस तथ्य को धराशाही कर पृथ्वी के गोल होने का प्रमाण दिया। समय ऐसा भी था जब दुनिया सूर्य को पृथ्वी का दीवाना बताती थी परंतु आधुनिक यंत्रों ने इसे भी बेबुनियाद ठहराया। इसी प्रकार जब आज इस आधुनिक युग में हम भारतीय संस्कृती के प्राचीन सार्वभौमिक सिद्धान्त "वसुधैव कुटुम्बकम" अर्थात (समूचा विश्व एक परिवार है) अपनाते हैं तो ढेरों नियम, कायदे, सिद्धांत धराशाही हो पड़ते हैं। जिनमे स्वयं भारत की कोख से जन्मे सार्वभौमिक नियम, सिद्धांत भी आते हैं। जिनमें महात्मा गाँधी के स्वदेशी , दादा भाई नाओर्जि के इकनोमिक ड्रेन , किसी भी राज्य की अस्मिता जैसे कायदे शीर...