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Showing posts from November, 2015

जीवन

कौन थाह लगा सका इस यात्रा का, हर एक शिकार है अपने चश्मे का। कुछ पुरुष तो कुछ पशू कहाए। बुनियादी औज़ारों ने सिखाया प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष का पाठ, और आज तथ्य हुए जीवन को तौलने का ...

सेवानीति नहीं करोगे वर्टो ?

राजनीति...!! एक ऐसा शब्द जिसे सुनते ही जनमानस के मस्तिष्क में भिन्न भिन्न मत जल उठते हैं कुछ लोग इसे एक दलदल का नाम देते हैं तो कुछ इस शब्द की ओर लालसा भरे निगाओं से टकटकी लगाए रहते हैं तो कुछ इसे अपने निजी स्वार्थ के लिए एक शस्त्र की तरह इस्तेमाल करते हैं। चाहे जो भी कह लें लेकिन एक स्वच्छ राजनीति और राजनीतिज्ञ की ज़रूरत आज सम्पूर्ण विश्व को है। कहते हैं नाम का प्रभाव मनुष्य शख्सियत पर ज़रूर पड़ता है। यह बात कितनी सही है इस बात का ज्ञान मुझे नहीं पर इतना ज़रूर है की राजनीति शब्द का प्रभाव राजनीतिज्ञों पर बखूबी पड़ा है। अरे जिस शब्द में ही राज करने का प्रलोभन हो उससे सेवा की उम्मीद ही कैसे की जा सकती है? कभी अटल जी , शाश्त्री जी जैसे नेताओं ने भारतीय राजनीति को नया आयाम दिया तो वहीँ ए राजा, कनिमोझी जैसों ने कलंकित। आपने नेताओं को किसी निम्न पद पर आसक्त व्यक्ति को गालियाँ देते या अपने शक्ति का प्रदर्शन करते अक्सर देखा ही होगा। • राजनीति नहीं सेवानीति पर आज बदलते युग के साथ-साथ समय इस शब्द में भी परिवर्तन चाहता है। राजनीति से सेवानीति में तब्दील होना और इस शब्द के मूल अर्थ की सा...