इंसान को गाली देने में प्रयुक्त शब्द का कुत्ता भी अपने क्षेत्र की सीमा पेशाब कर निर्धारित करता है। उस सीमा में किसी बाह्य कुत्ते के आगमन पर उस क्षेत्र के समस्त कुत्ते उसका विरोध करते हैं। खैर!! यह तो बात रही पशुओं की। पर भला हमे तो समस्त स्तनधारियों में सर्वश्रेष्ठ का ख़िताब मिला है फिर आखिर हमारे समक्ष ऐसी क्या आफत आ पड़ी जो हैदराबाद के निज़ाम को बलपूर्वक मित्र बनाया गया? जूनागढ़ में सेना घुसानी पड़ी, कश्मीर जैसे छोटे क्षेत्रफल में भी भारतीय सेना सबसे अधिक ज़ेब ढ़ीली कर रही, बीते माह भी भारत सरकार दूसरे (भूटान) के फट्टे में टांग अड़ा रही? वह भी चीन जैसे बड़े बनिया से दुश्मनी मोल लेते हुए? इन सभी सवालों के जवाब से पूर्व इस ताज़ा घटना (डोकलाम मुद्दा) का विश्लेषण हो जाए। 18वीं सदी में चीन मात्र चीन नहीं था। बल्कि "उड़ता चीन" था। अंग्रेजों की भेजी अफ़ीमें अपनी ज़िम्मेदारी बख़ूबी निभा रही थीं। और ब्रिटेन की GDP बढ़ा रही थी। दशकों तक चीन नशे की नींद सोया रहा। शायद यही कारण है के चीनी जागते हुए भी सोए प्रतीत होते हैं। परंतु अंग्रेज़ो की साज़िश का पता लगते ही चीन ने अफीम को अमृत बनाने की ठान ली।...
क्रिकेट भारत में मात्र एक खेल न होकर एक पूजा है। पर कलयुग की इस पूजा के साथ-साथ कई सट्टे रुपी आडम्बर भी आ गए। परंतु आज भारतीय माफ़िया, गैंगस्टर, सट्टेबाज़ों सभी के लिए शुभ दिन है। क्योंकि भारत में आईपीएल (IPL) में खिलाड़ियों की खरीद फरोख्त के साथ सट्टे को हरी झंडी मिल गई। आर्थिक तंगी का सामना कर रहे भारतीय अपराधियों को सट्टा एकमात्र लाइफलाइन प्रदान करता है। क्योंकि आज न तो पैसा हवाला में रहा न रियल स्टेट में ना ही अपहरण, हत्या जैसे अपराधों में। काम हाथ में लेने के बाद अगर पूरा हो भी गया तो उसके परिणामों की सज़ा भयावह है। सट्टे में अकूत धन कमा माफ़िया इसका इस्तेमाल अपने पूण्य के कामों में लगाता है। सट्टे से कमाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की भारतीय खेल जगत की 80% कमाई क्रिकेट से होती है। घर बैठे सरकारी नज़रों से बचते हुए सट्टा लगाना कमसकम अपहरण से तो कहीं बेहतर है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारतीय युवा आसानी से इस लपेटे में आ जाते हैं। और फिर शुरू होता है अमूमन हर छोटे-बड़े विद्या के मंदिर में सट्टे का खेल। अपराधियों द्वारा स्कूल, कॉलेजों के छात्रों को नियं...