क्रिकेट भारत में मात्र एक खेल न होकर एक पूजा है। पर कलयुग की इस पूजा के साथ-साथ कई सट्टे रुपी आडम्बर भी आ गए। परंतु आज भारतीय माफ़िया, गैंगस्टर, सट्टेबाज़ों सभी के लिए शुभ दिन है।क्योंकि भारत में आईपीएल (IPL) में खिलाड़ियों की खरीद फरोख्त के साथ सट्टे को हरी झंडी मिल गई।
आर्थिक तंगी का सामना कर रहे भारतीय अपराधियों को सट्टा एकमात्र लाइफलाइन प्रदान करता है। क्योंकि आज न तो पैसा हवाला में रहा न रियल स्टेट में ना ही अपहरण, हत्या जैसे अपराधों में। काम हाथ में लेने के बाद अगर पूरा हो भी गया तो उसके परिणामों की सज़ा भयावह है। सट्टे में अकूत धन कमा माफ़िया इसका इस्तेमाल अपने पूण्य के कामों में लगाता है। सट्टे से कमाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की भारतीय खेल जगत की 80% कमाई क्रिकेट से होती है। घर बैठे सरकारी नज़रों से बचते हुए सट्टा लगाना कमसकम अपहरण से तो कहीं बेहतर है। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारतीय युवा आसानी से इस लपेटे में आ जाते हैं। और फिर शुरू होता है अमूमन हर छोटे-बड़े विद्या के मंदिर में सट्टे का खेल। अपराधियों द्वारा स्कूल, कॉलेजों के छात्रों को नियंत्रित करना काफी आसान होता है। इस प्रकार छात्र वर्ग भी जाने-अनजाने में सट्टा माफियाओं के लिए एजेंट का काम कर रहा। आईपीएल में सट्टा अपराधियों को एक सुलभ अवसर देता है जिसकी आग पर अनेक छुट भैया टाइप गुंडे भी अपनी रोटियाँ सेंकते हैं।
यूँ तो सट्टेबाज़ी के नियम सरल हैं। कौन जीतेगा से कौन हारेगा तक के बाद जीतने या हारने वाले पर दांव लगा दिया जाता है। ख़ुद को क्रिकेट पंडित मानने वाले जम कर इस खेल में अपनी किस्मत आजमाते हैं। भारत में सट्टेबाज़ी गैरकानूनी है। हालाँकि की ऐसे कई देश हैं जहाँ सट्टेबाज़ी कानूनी तौर पर जायज़ है जैसे साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, श्री लंका, न्यूजीलैंड।समय- समय पर जाँच एजेंसियों द्वारा धरे गए बुकियों ने कुबूलानामे में कहा कि न सिर्फ अंडरवर्ल्ड जैसे दर्जनों दक्षिण एशियाई गिरोह इस खेल में शामिल हैं बल्कि कई देशों के क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी भी अपना योगदान सट्टे में दे रहे। अनेक छोटे बड़े कारोबारी आईपीएल के दौरान टी.वी. के सामने बैठ नज़रें खेल पर होती हैं और हाथ मोबाइल पर जो हर बढ़ते- गिरते रनों के साथ सट्टे के भाव मिलाते हैं।
कानून तो कई बने और बिगड़े। लेकिन सट्टे पर नकेल कसना इतना सरल नहीं। नियम कितने भी सख्त कर दिए जाए पर भारतीय पुलिस हर 123 करोड़ लोगों के पीछे एक-एक पुलिस वाला निगरानी को नहीं छोड़ सकती।
कोई सट्टेबाज़ी को कानूनी करने का समर्थन करे न करे लेकिन भारत को डी कंपनी जैसी गिरोहों को फायदा पहुँचाने से पहले सोचना चाहिए।
कोई सट्टेबाज़ी को कानूनी करने का समर्थन करे न करे लेकिन भारत को डी कंपनी जैसी गिरोहों को फायदा पहुँचाने से पहले सोचना चाहिए।
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