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Lovely ka time-table

कभी बंद किताब के अंदर बिखरे हुए पन्नों को देखा है? कभी किसी अच्छे भले मुस्कुराते चेहरे में टूटे दांतों को देखा है? कभी अच्छी भली सपाट भूमि पर folding-faulting देखा है? कुछ यही हाल है हम B.A.(2nd year) वालों के समय-सारिणी (time-table) का भी।

Lovely में कोई नियम चले न चले पर एक नियम ऐसा है जो अच्छे-भले, दुबले-मोटे छात्र- छात्राओं को भी सुबह यूनिवर्सिटी आते समय दौड़ने पर मजबूर कर देता है वो है attendence के लिए समय पर कक्षा में पहुचना। 5 मिनट की देरी भी आपको अपनी attandance गवां कर चुकानी पड़ सकती है। Lovely में इस नियम पर ख़ासा ध्यान दिया जाता है। कारण पूछने पर आप पाएंगे की समय का महत्व जीवन में ज़रूरी है अतः समय पे कक्षा में आये और अपने समय का सदुपयोग करे। पर दूसरी तरफ छात्रों को कक्षाओं के बिच मिलने वाला गैप उनकी समय सदुपयोग करने की आदत की धज्जियाँ उड़ा देता है। घंटे दो घंटे कक्षा में पढ़ने के बाद मिले घंटे दो घंटे के गैप में कुछ छात्र दोस्तों के साथ गप्पे मारने निकल पड़ते है, कुछ मॉल यात्रा पर, कुछ अपने होस्टल, तो कुछ मॉल में यूनिवर्सिटी प्रशाशन द्वारा उपलब्ध कराए गए मॉल के निचे बने क्लब में। बचे कूचे लोग आपको लाइब्रेरी में दिख जायेंगे।
बात यहीं ख़त्म नहीं होती classes की इस अनियमितता एक रोज़ की बात नहीं, हर रोज़ आप नए  टाइम-टेबल का अनुभव करेंगे। जो छात्रो में किस प्रकार की समय सदुपयोग की समझ पैदा कर रही है यह आप समझ सकते है।

बचपन में स्कूल के दौरान वो जल्दी इंटरवल आने की तड़प तो आप सब को याद होगी। जहाँ पुरे दिन में सिर्फ एक घंटे का गैप मिलता और उसके उपरांत लगातार क्लासेज। रोज़ का एक ही नियम जिससे बच्चों में समय सदुपयोग और लगातार काम करने की ललक पैदा होती है। यही नहीं भारत के अनेक कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में लगातार क्लासेज चलने के नियम बनाये गए है जिसमे IIT rorkee, NIIT, DU के कई कॉलेज शामिल है। Lovely जहाँ एक तरफ छात्रों को attendance बनाने की हिदायत देती है वहीं छात्रों को समय गवाने का समय और मॉल, क्लब अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराती है।

सुनने में तो यह भी है की प्रशासन lovely को विश्व के टॉप 100 विश्वविद्यालय रैंकिंग में लाने में प्रयासरत है ऐसे में समय को सर्वोपरि रखना ज़रूरी होगा। सभी ने यह देखा होगा के सेमेस्टर के अंत में विद्यार्थी-अध्यापक दोनों attendance  के लिए जागरूक होते और कराये जाते है। सिर्फ अटेंडेंस के लिए ही नहीं बल्कि परीक्षा सर पे आ जाने के बाद परीक्षा की तैयारी में लगना, क्या इसमें समय के दुरूपयोग का ज़िम्मेदार हमारा टाइम-टेबल सिस्टम नहीं?? टाइम-टेबल में उपजी इस बीमारी के इलाज़ के लिए मेरे कुछ मित्र आये दिन स्टाफ-रूम में अपनी चप्पलें घिसा करते हैं नतीजा.....खाली हाथ वापसी। आज अगर गब्बर जिन्दा होता तो न जाने कितने छात्र खाली हाथ आने की वजह से.......।

 खैर..... अब जो भी कोशिश जारी रहनी चाहिए। उम्मीद है मेरे साथी मेरे विचारों को आत्मसात करेंगे बल्कि उसपे अपनी प्रतिक्रिया कर इस कार्य में योगदान भी देंगे और बड़े हमारा मार्गदर्शन।।...।।

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