पहले मैं साफ़ कह दूँ के मैं किसी धर्म के खिलाफ नहीं। धर्म तो मानव जाती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ढंग है जीवन जीने का चाहे कोई भी धर्म हो। पर धर्म के नियम या जो syllabus है क्या वो हमेशा सामान रहेगा? कभी बदलना नहीं चाहिए?
आज हमारे देश में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में isis का आतंक सुर्ख़ियों में है। सोशल मीडिया पर जिहाद के नाम पर रोज़ाना किसी वीडियो में कभी छत से फेंक कर, गला रेत कर, बच्चे से उसकी माँ की हत्या करवा वीडियो डाल लोगो में दहशत फैलाई जा रही।
जहाँ एक तरफ मध्य एशिया आतंकवाद में जल रहा है वही धीरे-धीरे इस आग की तपन भारत तक महसूस हो रहीं हैं ।और कुछ दिनों पहले जो ताजातरीन भारतीय अध्यापकों के अगवा करने का मामला हमारे सामने आया उसमें आतंकियों ने उन्हें ये कह कर छोड़ा के हम टीचर्स को नहीं मारते:: वाह मेरी तो आँखें भर आई... झूठ भी कमसे कम हज़म होने वाला बोला करो... सीरिया,इराक जैसे मुल्कों में जिन हज़ारों निर्दोषो को मारा उसमे टीचर्स नहीं होंगे क्या? साफ़ है भारतीय युवाओं में लोकप्रियता पाने लिए यह किया गया।
जब भी आतंकवाद की बात उठती है उसमें इस्लाम का नाम ज़रूर जुड़ता है ये बात तो जग ज़ाहिर है। मुसलमानों को जिहाद का पाठ पढना हो या काफिरों को मार जन्नत में जाना सब कुरान की देंन है। अगर ऐसा नहीं है तो क्यू नहीं कोई ईसाई, बुद्ध,यहूदी, या हिन्दू धर्म के नाम पर ऐसा नहीं करते? T&C apply. हाँ छोटे पैमाने पर तो विवाद हर जगह होता है फिर चाहे बात धर्म की हो या बच्चों का अपने टॉफ़ी के लिए।। पर जिहाद की बिमारी अलग है।
पुराने समय में जब मुसलमान छोटे-छोटे कबीलों और राज्यों में बटे होते थे और उन पर दूसरे कबीलों के लोग हमला कर देते थे इसी आधार को लेकर कुरान में यह लिख गया के काफिरों( गैर मुस्लमान)को मारो। तो क्या आज भी इस लोकत्रांतिक समाज में हमें ऐसी बेतुकी बातों का समर्थन करना चाहिए? हालाँकि कुरान की बहुत सी बातों का मैं समर्थन करता हूँ। पर फिर भी कुछ ज़िहादी ठेकेदार भोले भाले युवाओ को अपने जाल में फांसने में कामयाब हो ही जाते है।
अब बात करते हैं जिहाद के ठेकेदारों की यानी ISIS
आखिर कौन है ये ISIS कहाँ से आया?
यूँ तो आपने बहुत से कारण सुने होंगे पर आज हम इसके बीज़ निकालेंगे। isis के उत्पन्न होने के जो मुख्य कारण है वो दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की तरफ इशारा करते है यानी के america ,जी हाँ सही पढ़ा आपने। 2003 में जब जॉर्ज बुश ने इराक में रेड किया सद्दाम और अल-कायदा गठबंधन के बहाने तो उन्होंने वहां की डेमोक्रेसी, ब्यूरोक्रेसी, आर्मी सब नष्ट कर डाला और एक स्वतंत्र आर्मी बनाई जिसका खर्च, हथियार आज भी अमेरिका मुहैया करता है। बताने की ज़रुरत नहीं है के आतंकवाद भी पैसे के बिना कुछ नहीं, यूँ तो ISIS के कमाने के कई जरिये है जैसे- मिडिल ईस्ट के कई तेल के कुओं पर कब्ज़ा, डकैती, फिरौती, बैंक में लूट पाट, ancient साईट से चुराई चीज़ों की ब्लैक मार्किट में सेल वगैरह- वगैरह। कुरान तो नहीं पढ़ी मैंने पर कमसकम ऐसा करने को तो नहीं लिखा होगा।
हाल ही में इस संगठन ने अपना मैप जारी किया जिसमें यूरोप के कुछ हिस्सों से लेकर भारत तक अपना अधिकार बताया है। देखने वाली बात है की इस्लामिक स्टेट का पसंदीदा और धार्मिक रंग काला है ठीक हमारे विपरीत। इनके कैदियों को भगवा रंग ही पहनाया जाता है....भगवा जो त्याग का प्रतीक है, शांति का वाहक है.. इनका लक्ष्य इसी से ज़ाहिर होता है के ये भगवे के खिलाफ हैं।
चाहे बात शक्तिमान के तमराट किलविस के ड्रेस की हो या विकराल गब्राल के भूतों की सबका पसंदीदा रंग एक है, हाँ कुछ बूढ़ी चुड़ैलों का नहीं कह सकता।।
आज हमारे देश में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में isis का आतंक सुर्ख़ियों में है। सोशल मीडिया पर जिहाद के नाम पर रोज़ाना किसी वीडियो में कभी छत से फेंक कर, गला रेत कर, बच्चे से उसकी माँ की हत्या करवा वीडियो डाल लोगो में दहशत फैलाई जा रही।
जहाँ एक तरफ मध्य एशिया आतंकवाद में जल रहा है वही धीरे-धीरे इस आग की तपन भारत तक महसूस हो रहीं हैं ।और कुछ दिनों पहले जो ताजातरीन भारतीय अध्यापकों के अगवा करने का मामला हमारे सामने आया उसमें आतंकियों ने उन्हें ये कह कर छोड़ा के हम टीचर्स को नहीं मारते:: वाह मेरी तो आँखें भर आई... झूठ भी कमसे कम हज़म होने वाला बोला करो... सीरिया,इराक जैसे मुल्कों में जिन हज़ारों निर्दोषो को मारा उसमे टीचर्स नहीं होंगे क्या? साफ़ है भारतीय युवाओं में लोकप्रियता पाने लिए यह किया गया।
जब भी आतंकवाद की बात उठती है उसमें इस्लाम का नाम ज़रूर जुड़ता है ये बात तो जग ज़ाहिर है। मुसलमानों को जिहाद का पाठ पढना हो या काफिरों को मार जन्नत में जाना सब कुरान की देंन है। अगर ऐसा नहीं है तो क्यू नहीं कोई ईसाई, बुद्ध,यहूदी, या हिन्दू धर्म के नाम पर ऐसा नहीं करते? T&C apply. हाँ छोटे पैमाने पर तो विवाद हर जगह होता है फिर चाहे बात धर्म की हो या बच्चों का अपने टॉफ़ी के लिए।। पर जिहाद की बिमारी अलग है।
पुराने समय में जब मुसलमान छोटे-छोटे कबीलों और राज्यों में बटे होते थे और उन पर दूसरे कबीलों के लोग हमला कर देते थे इसी आधार को लेकर कुरान में यह लिख गया के काफिरों( गैर मुस्लमान)को मारो। तो क्या आज भी इस लोकत्रांतिक समाज में हमें ऐसी बेतुकी बातों का समर्थन करना चाहिए? हालाँकि कुरान की बहुत सी बातों का मैं समर्थन करता हूँ। पर फिर भी कुछ ज़िहादी ठेकेदार भोले भाले युवाओ को अपने जाल में फांसने में कामयाब हो ही जाते है।
अब बात करते हैं जिहाद के ठेकेदारों की यानी ISIS
आखिर कौन है ये ISIS कहाँ से आया?
यूँ तो आपने बहुत से कारण सुने होंगे पर आज हम इसके बीज़ निकालेंगे। isis के उत्पन्न होने के जो मुख्य कारण है वो दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की तरफ इशारा करते है यानी के america ,जी हाँ सही पढ़ा आपने। 2003 में जब जॉर्ज बुश ने इराक में रेड किया सद्दाम और अल-कायदा गठबंधन के बहाने तो उन्होंने वहां की डेमोक्रेसी, ब्यूरोक्रेसी, आर्मी सब नष्ट कर डाला और एक स्वतंत्र आर्मी बनाई जिसका खर्च, हथियार आज भी अमेरिका मुहैया करता है। बताने की ज़रुरत नहीं है के आतंकवाद भी पैसे के बिना कुछ नहीं, यूँ तो ISIS के कमाने के कई जरिये है जैसे- मिडिल ईस्ट के कई तेल के कुओं पर कब्ज़ा, डकैती, फिरौती, बैंक में लूट पाट, ancient साईट से चुराई चीज़ों की ब्लैक मार्किट में सेल वगैरह- वगैरह। कुरान तो नहीं पढ़ी मैंने पर कमसकम ऐसा करने को तो नहीं लिखा होगा।
हाल ही में इस संगठन ने अपना मैप जारी किया जिसमें यूरोप के कुछ हिस्सों से लेकर भारत तक अपना अधिकार बताया है। देखने वाली बात है की इस्लामिक स्टेट का पसंदीदा और धार्मिक रंग काला है ठीक हमारे विपरीत। इनके कैदियों को भगवा रंग ही पहनाया जाता है....भगवा जो त्याग का प्रतीक है, शांति का वाहक है.. इनका लक्ष्य इसी से ज़ाहिर होता है के ये भगवे के खिलाफ हैं।
चाहे बात शक्तिमान के तमराट किलविस के ड्रेस की हो या विकराल गब्राल के भूतों की सबका पसंदीदा रंग एक है, हाँ कुछ बूढ़ी चुड़ैलों का नहीं कह सकता।।

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