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गाँधी जयंती: भगत सिंह से ज़्यादा हिंसक थे महात्मा गांधी

वैसे तो जिन लोगों के कारण आज हम सब खुली हवा में सांस ले रहे उनपर कुछ भी कहने का अधिकार मुझे क्या किसी भी भारतीय को नहीं, ऐसा मैं समझता हूँ। लेकिन जिस तरह से आज के आधुनिक युग में दूसरे की छवि धूमिल कर खुद को चमकाने का सरल, सस्ता और गिरा हुआ माध्यम अपनाया जा रहा उससे यह लेख लिखना ज़रूरी हो गया है।

महात्मा गाँधी को इस देश में कुछ लोग यह कह तिरस्कृत कर देते हैं के महात्मा गांधी की आज़ादी लेने की शैली गलत थी, यांनी अहिंसा की। और वहीँ दूसरी ओर वे शहीद भगत सिंह को उनकी हिंसा की शैली के लिए सच्चा देश भक्त बताते हैं। पर शायद उन्हें ज्ञात नहीं के महात्मा गाँधी भगत सिंह से ज्यदा हिंसक थे।

अरे भाई, चाकू दूसरे की गर्दन पर रखो या अपनी, बात तो एक ही है। हत्या करने की धमकी दूसरों को दो या खुद को  बात बराबर है। हानि दूसरो को पहुचाओ या स्वयं को, दोनों हिंसा के श्रेणी में ही आते हैं। भगत सिंह ने असेंबली में बम विस्टफोट कर दूसरों की जान जोखिम में डाली तो महात्मा गांधी ने आमरण अनसन की चुनौती देकर खुद की जान जोखिम में। जिस व्यक्ति के करोङो अनुयायी हों, अगर वो जान देने की बात करे, सभाए कर भीड़ को साशन के खिलाफ करे इससे बड़ा हिंसा का प्रहार अँगरेज़ अधिकारीयों पर और क्या हो सकता था। पर बापू की इस हिंसा में मानवता और सदाचार की कल्याणकारी अहिंसा छुपी थी।

महात्मा गाँधी और भगत सिंह एक कैंची

महात्मा गाँधी और भगत सिंह कैची का काम करते थे। दोनों कैचियों की दो धारों का रूप ले अंग्रेजों की जड़े काटने का काम करते थे। किसकी शैली उचित थी किसकी गलत यह निर्णय करना हमारा कार्य नहीं। हमारे लिए देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले प्रत्येक शहीद पूजनीय होना चाहिए। चाहे बात शहीद व्यक्तियों की हो या महाराणा प्रताप के चेतक घोड़े जैसे जानवरों की।

महात्मा गाँधी को बदनाम करने के अनेक हथकंडे अपनाये गए कभी देश द्रोही कह तो कभी महिलावादी, लोगो को भ्रमित करने के लिए फ़र्ज़ी तस्वीरों को मीडिया में छोड़ दिए गए।


पाकिस्तान की नज़र में बापू

पाकिस्तान में बापू को देश द्रोही माना जाता है। क्योंकि बापू देश के विभाजन के खिलाफ थे। यह बात अलग है के किसी कारण वष उन्हें विभाजन के लिए सहमत होना पड़ा। कहते हैं दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है। अगर आप भी बापू का विरोध करते हो तो आप किसी पाकिस्तानी देशद्रोही से कम नहीं। सिर्फ बापू ही नहीं बापू को मारने वाले नाथूराम गोडसे को rss का एजेंट बता देश हित में काम करने वाली संस्था RSS (राष्ट्रिय सस्वयं सेवक संघ) को भी बदनाम किया जाता है। यानि  देश के नागरिकों को अपने देश और देश भक्तों से नफरत कराने का भरसक प्रयास किया जा रहा।  ताकि देश को बांटा जा सके। अब आप खुद निर्णय करे कौन सही कौन गलत।
महान सक्सियतों को बदनाम कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करना इस देश में प्रचलन बन चुका है। बीते दिनों देश के प्रसिद्ध न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने अपने ट्वीट में गाँधी जी को अपशब्द कहे साथ ही किरण बेदी को धोखेबाज का तोहमत लगा दिया। किरण बेदी मेरी नज़र में एक सच्ची देश भक्त हैं अन्ना का आंदोलन हो या भाजपा का समर्थन जहाँ उन्हें देश के कल्याण की रह दिखती वे उसी पर चल पड़ती। आप इसी से अंदाज़ा लगा सकते हैं की काटजू जी ने अपने जीवन काल में किस प्रकार की न्याय पद्वति अपने होगी।

आज गांधी जयंती के दिन अगर बापू को सच्ची श्रधांजलि देनी है तो हमे सबसे पहले अपने मन को साफ़ करना होगा। विचारों का पुनर्निरीक्षण करना होगा। देश के स्वच्छता अभियान में भागीदार बने।  मल्लाहों का चक्कर छोडो तैर के दरिया पार करो~ यानि नेताओं के नज़रिये से नहीं तथ्यों को अपने नज़रिये से देखना शुरू करो।


ईस्ट इंडिया कंपनी की भारत लूटने के लिए नीतियाँ

इतिहास पढ़ने वालो को मालूम होगा के जब भारत पर अँगरेज़ शाशन का हुकूमत होता था और BEIC नामक कंपनी देश में व्यापर करते करते राजनितिक अधिपत्य हासिल कर लिया। उस कंपनी के समय में एक दौर आया जब कंपनी घाटे में चलने लगी इसका कारण था कंपनी में कार्यरत अधिकारी और सेवक कंपनी के नियम अनुसार न चल खुद के मुनाफे पर अधिक ज़ोर देने लगे। इस समस्या से निजात पाने के लिए अधिकारीयों ने निजी  व्यापार पर प्रतिबन्ध लगा दिया जिससे कंपनी को भारी मुनाफे हुए और आगे चल कर भारत पर कब्ज़ा कर लिया गया। ठीक इसी तरह अगर आप देश की उन्नति चाहते हैं तो देश को प्राथमिकता दें आपका भला खुद-ब-खुद हो जायेगा साथ ही उन अनेक असहाय, गरीब परिवारों का भी।

जागो ! अन्यथा इतिहास  खुद को फिर दुहरायेगा, ग़ुलामी फिर आएगी।


पुरे विश्व में आज जिस प्रकार का माहौल है उसे देख कुछ समस्याओं के प्रति हमे अभी से एक जुट हो जाना होगा अन्यथा वो ग़ुलामी और कत्ले-आम के दिन दूर नहीं। सारी दुनियां आज इस्लामिक स्टेट की क्रूरता से वाकिफ है ये संगठन किस प्रकार मुसलमानों को धर्म के नाम पर पाप करा रहा यह बात जगजाहिर है। बीते दिनों असम के कुछ भोले भले युवा इस संगठन के झांसे में आ गए, बांग्लादेश में एक क़त्ल का श्रेय isis  को दिया गया। मक्का में मची भगदड़ में सैंकणो मारे गए जिसकी सुधार में एक मौलवी ने मक्का की सुरक्षा का जिम्मा isis को देने की वकालत की। ये सारी खबरे उस मनहूस हवा का झोंका है जो हमें आने वाले तूफ़ान से वाकिफ कर रही और समय रहते निपटने का मौका दे रही। जागो मेरे साथियों अब किंचित भी देर ना करो। धर्म-मजहब-जाती की बंधनो को तोड़ एकजुट हो जाओ।


महात्मा गाँधी स्वच्छता पसंद और सामाजिक समानता पर विश्वास करते थे। ऊँच नीच का उनके ह्रदय में कोई स्थान न था शायद यही कारण है के उन्हें सभी वर्गों का लगाव हासिल था। कहते हैं सोचना ही हो तो बड़ा सोचो...आज इन महान कार्यों को अपने भीतर आत्मसात करो। देश के बारे में सोचो। मानवता के बारे में सोचो। और इसी ऊर्जा को अपने सम्बंधियों में प्रवाहित करो।


यही एकल मार्ग है आज़ादी (राम राज्य) का। जहाँ तुम और मैं आज़ादी से अपने देश की मिटटी की खुली हवा में स्वांस ले सकेंगे ,जहाँ हम अपने सपनो को साकार करेंगे। जहा हम  आने वाली पीढ़ियों के जीवन को नयी दिशा दे सकेंगे।उस महात्मा के बारे में और क्या लिखूं जिसने अपने जीवन का लक्ष्य दूसरों की सेवा बना लिया हो। भारत ही नहीं बल्कि पुरे विश्व को सुशासन  (राम राज्य) देने की चेष्टा करने वाले महापुरुष के भीतर जब नाथूराम की गोली घुसी तो उसे भीतर सिवाय राम के कोई दूजा न मिला। उस महापुरुष के मुख से न माँ  निकला न पिता, निकला तो सिर्फ एक नाम।

                                  ~// हे राम//~

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